Tuesday, December 7, 2010


दीनदयाल शर्मा की दो राजस्थानी कविताएं

बूढा मा-बाप

बूढा मा-बाप
घर रा
जींवता-जागता ताळा
अर घर रा रूखाळा।

जुवान मा-बाप

मन री
सगळी बात
पूरी करै
हातोहात।

(Photo : Children writer Deendayal Sharma with Mother Maha devi Joshi)

दीनदयाल शर्मा की दो राजस्थानी कविताएं


दीनदयाल शर्मा की दो राजस्थानी कविताएं

बूढा मा बाप-1

आं री
एक ई ठौड़
अब
बंद होयगी दौड़।

बूढा मा बाप-2

आं कन्नै
कुण बैठै रोज
सबनै लागै बोझ।

Saturday, December 4, 2010

औळमौ / दीनदयाल शर्मा


औळमौ / दीनदयाल शर्मा

पांच बरसां री
बेटी मानसी
केठा
क्यूं निराज है

घर रै
एक खुणै में खड़ी
मन्नै देखतांईं
फूट पड़ी

पापा
आपरी जोड़ायत नै
समझाल्यौ
मन्नै लड़ती रैवै

घर-घर खेलूं
तो कैवै पढ

चित्र बणाऊं
तो कैवै पढ

किणी सूं
बात करूं
तो कैवै पढ

काणी सुणाण रौ
कैवूं
तो कैवै पढ

आखै दिन
पढ-पढ'ई
क्यूं कैवै मम्मी

मेरै सूं
बात क्यूं कोनी करै
मम्मी

म्हां सूं
बात कर मम्मी।

दीनदयाल शर्मा की राजस्थानी कविताएं


दीनदयाल शर्मा की राजस्थानी कविताएं

टाबर - 1

टाबर हांसै-मुळकै
अर
करै मीठी-मीठी बातां
टाबर
सदांईं बोलै
सांच

आपां
टाबरां सूं सीखां
आपां
टाबरां ज्यूं दीखां।

टाबर - 2

टाबर सूं
कोई
क्यूं नीं
करै बात

स्यात
इण कारण
कै
टाबर री
हरेक बात में
हुवै सुवाल।

टाबर - 3

टाबर
मार खाण रै
थोड़सीक ताळ पछै
हुज्यै
बीस्या रा बीस्या

टाबर
नीं बांधै गांठ

अर आपां
छोटी सी बात माथै
बांधल्यां घुळगांठ।

टाबर -4

टाबरां नै
नीं खेलणद्यै
मा-बाप
माटी में


माटी सूं
कियां हुवै मोह
टाबरां नै

स्यात
इणी कारण
चल्याजै
थोड़साक बड्डा हुंवतांईं
टाबरिया परदेस।

टाबर - 5

टाबर
कित्ता बोलै सांच
नीं जाणै
बणावटी बातां
जात-पांत

अर
भेदभाव भी
नीं जाणै
टाबर

स्यात जदी हुवै
टाबर
भगवान रौ रूप।

Friday, November 12, 2010

राजस्थानी भासा री मानता सारू आपरी टीप री दरकार .

ओ समाचार दैनिक भास्कर (13 नवम्बर 2010 ) रै "हनुमानगढ़ संस्करण" में पेज 13 माथै छप्यो है ..आप राजस्थानी भासा प्रेमी हो....आप इण माथै टीप कर'र आपरी मुहर लगाओ सा..

Tuesday, October 5, 2010

पोथी परख


बाळपणै री बातां

'बाळपणै री बातां' बाल साहित्यकार दीनदयाल शर्मा री आपरी यादां री अेक लाम्बी जातरा है। अठै लेखक आपनै खुद नै पोथी रै केन्द्र में राखता थकां टाबरां रै जीवन री अबखायां अर बां'रै जीवन री मस्तियां रौ अेक सांगोपांग वर्णन कर्यौ है। माणस रौ बाळपणौ अर बाळपणै री बातां अर यादां बीं'रै जूण री सगळां संू अनमोल खजानौ हुवै। बाळपणै रा साथी-संगळियां नै माणस कदी नीं भूल सकै। लिखारा ईंयां लागै जियां बां' जद आ' पोथी मांडणी सरू करी, तद बै' खुद फेरूं अेकर जमां'ईं टाबर बणग्या हुवै। बाल मनोविग्यान री आपां तो बातां करां पण दीनदयाल शर्मा तो टाबरां रै बाल मनोविग्यान रा जादूगर है। बै' टाबर रै मन मांय ऊंडै तांईं देखण री कूंवत राखै। बां' कन्नै आपरै बाळपणै री यादां रौ अेक पूरौ भंडार है। आ' बात इण पोथी मांय आच्छी तरियां सिद्ध होवै।
आजकाल रा मा-बाप आपरै टाबरां साथै ज्यादा बतळावण कोनी करै। अर टाबर मानसिक अवसाद रा शिकार हो'र बीमारियां संू घिरज्यै। अर बां' रै शरीर रौ भी विकास नीं होवै पण इण पोथी मांय आ' बात पाठकां रै दिल तांईं सीधी पहुंचै। लिखारा आपरै टाबरां साथै कियां घुळमिल'र रैवै अर बां'रै साथै रोजिना बतळावण करै। अर आ' बतळावण ही बां' रै टाबरां मांय अेक नंूवै आत्मविसवास रौ विकास करै। लेखक आपरै बाळपणै री आज रै बाळपणै संू तुलना ईं पोथी मांय करी है। बीं' टेम पढाई बिना कोई मानसिक दवाब संू होंवती। टाबरां मांय बीं' टेम अेक बणावटी दौर कोनी हो। सगळा आपरी श्रद्धा सारू पढता अर घरआळा भी टाबरां ऊपर ज्यादा आपरी महत्वकांक्षा कोनी लादता। आ' बात आज रै अभिभावकां सारू ईं पोथी में सोवणौ अर साफ-साफ संदेश है।

दीनदयाल शर्मा टाबरां माथै पढाई रै बढतै बोझ माथै भौत चिन्त्या करता थकां कै'यौ है कै- आज टाबर री सावळ बढवार वास्तै बी'नै खेलणौ-घूमणौ भौत जरूरी है। नीं तो बौ' टाबर शरीर अर मन दोनां सूं कमजोर रै' ज्यासी। आज री पढाई व्यवस्था माथै चिंत्या दरसांवतां थकां लेखक ईं व्यवस्था मांय बदळाव करणै सारू जोर देवै। आज री व्यवस्था अक्षर ग्यान माथै जोर देवै अर लेखक टाबर नै व्यवहारिक ग्यान माथै जोर देवै। पोथी मांय 47 आलेख है जिका सरावण जोग है।

भासा सरल अर सहज, छपाई अर कागज सोवणा, चितराम भी संस्मरण मुजब। पोथी पढणौ सरू कर्यां पाठक पूरी पढ'र ई छोडै। इणनै आखै देश में पाठकां रौ प्यार मिलसी। राजस्थानी भासा में टाबरां रै संस्मरण री स्यात आ' पैली पोथी है। म्हारी घणी-घणी शुभकामना अर बधाई।

पोथी - बाळपणै री बातां
लेखक - दीनदयाल शर्मा
विधा - बाल संस्मरण
पृष्ठ - 112
संस्करण - 2009
मोल - 200 रिपिया
प्रकाशक - टाबर टोल़ी
10 /22 आर.एच.बी.,
हनुमानगढ़ जं.-335512
(राजस्थान)

- सतीश गोल्याण, मु.पो. जसाना, तहसील- नोहर, जिला-हनुमानगढ़, राज. मो. 9929230036