Friday, December 17, 2010
"बालपनै री बातां " / दीनदयाल शर्मा
Dainik Bhaskar, 14 Dec. 201
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"बालपनै री बातां " / दीनदयाल शर्मा
Punjab Kesari, 14 Dec. 2010
"बालपनै री बातां " / दीनदयाल शर्मा
Dainik Tej, 14 Dec. 2010
Tuesday, December 7, 2010
दीनदयाल शर्मा की दो राजस्थानी कविताएं
बूढा मा-बाप
बूढा मा-बाप
घर रा
जींवता-जागता ताळा
अर घर रा रूखाळा।
जुवान मा-बाप
मन री
सगळी बात
पूरी करै
हातोहात।
(Photo : Children writer Deendayal Sharma with Mother Maha devi Joshi)
दीनदयाल शर्मा की दो राजस्थानी कविताएं
दीनदयाल शर्मा की दो राजस्थानी कविताएं
बूढा मा बाप-1
आं री
एक ई ठौड़
अब
बंद होयगी दौड़।
बूढा मा बाप-2
आं कन्नै
कुण बैठै रोज
सबनै लागै बोझ।
Saturday, December 4, 2010
औळमौ / दीनदयाल शर्मा
औळमौ / दीनदयाल शर्मा
पांच बरसां री
बेटी मानसी
केठा
क्यूं निराज है
घर रै
एक
खुणै में खड़ी
मन्नै देखतांईं
फूट पड़ी
पापा
आपरी जोड़ायत नै
समझाल्यौ
मन्नै लड़ती रैवै
घर-घर खेलूं
तो कैवै पढ
चित्र बणाऊं
तो कैवै पढ
किणी सूं
बात करूं
तो कैवै पढ
काणी सुणाण रौ
कैवूं
तो कैवै पढ
आखै दिन
पढ-पढ'ई
क्यूं कैवै मम्मी
मेरै सूं
बात क्यूं कोनी करै
मम्मी
म्हां सूं
बात कर मम्मी।
दीनदयाल शर्मा की राजस्थानी कविताएं
दीनदयाल शर्मा की राजस्थानी कविताएं
टाबर - 1
टाबर हांसै-मुळकै
अर
करै मीठी-मीठी बातां
टाबर
सदांईं बोलै
सांच
आपां
टाबरां सूं सीखां
आपां
टाबरां ज्यूं दीखां।
टाबर - 2
टाबर सूं
कोई
क्यूं नीं
करै बात
स्यात
इण कारण
कै
टाबर री
हरेक बात में
हुवै सुवाल।
टाबर - 3
टाबर
मार खाण रै
थोड़सीक ताळ पछै
हुज्यै
बीस्या रा बीस्या
टाबर
नीं बांधै गांठ
अर आपां
छोटी सी बात माथै
बांधल्यां घुळगांठ।
टाबर -4
टाबरां नै
नीं खेलणद्यै
मा-बाप
माटी में
माटी सूं
कियां हुवै मोह
टाबरां नै
स्यात
इणी कारण
चल्याजै
थोड़साक बड्डा हुंवतांईं
टाबरिया परदेस।
टाबर - 5
टाबर
कित्ता बोलै सांच
नीं जाणै
बणावटी बातां
जात-पांत
अर
भेदभाव भी
नीं जाणै
टाबर
स्यात जदी हुवै
टाबर
भगवान रौ रूप।
Friday, November 12, 2010
राजस्थानी भासा री मानता सारू आपरी टीप री दरकार .
ओ समाचार दैनिक भास्कर (13 नवम्बर 2010 ) रै "हनुमानगढ़ संस्करण" में पेज 13 माथै छप्यो है ..आप राजस्थानी भासा प्रेमी हो....आप इण माथै टीप कर'र आपरी मुहर लगाओ सा..
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