Wednesday, July 28, 2010

दीनदयाल शर्मा : डुक - 1


डुक - 1

च्यार साल रो छोरो है,
स्कूल कोनी जावै,
पण टी वी आल़ा विज्ञापन,
मुख जबानी आवै.

दीनदयाल शर्मा

Monday, July 19, 2010

दीनदयाल शर्मा की हास्य कविता / धापी



धापी
बोदियै बजार में
खड़ी बूढळी धापी
प्रौढ शिक्षा में
जावै ही पढण
ले'र कापी।

ताजा होयोड़ी ही
बरसात
तिसळगी हातोहात,
इत्ती दूर गई कापी
कै
नापणियै ईं नापी।

सा'मै स्यूं आयौ डैण
मिला नैण स्यूं नैण
कन्नै आयौ टुळक'र
फेर बोल्यौ मुळक'र
लै' पकड़ प्रिय कापी
अर देखती रै'गी धापी।


बा' सोचण लागी
मन में
अर झुरझरी छुट्टी
तन में....
कै भरी जुवानी नीं
पट्यौ कोई पापी
अर बुढापै में
राममारयो
पटग्यौ आपी।

Wednesday, July 14, 2010

राजस्थानी लघु कथावां / दीनदयाल शर्मा




अंतस री पीड़

दरखत री उदासी देख'र बेलड़ी पूछ्यौ-'आज थे इत्ता उदास क्यूं हो?'

दरखत बोल्यौ-'आपणै पाड़ोसी रौ छोरौ भी लीक्खण लाग ग्यौ।'

'तो इण में उदास होण री कांईं बात है। थानै तो राजी होवणौ चाइजै।' बेलड़ी आंख्यां मटकांवती बोली।

दरखत लाम्बी सांस ले'र कैयौ-'दु:ख तो इण बात रौ है कै औ' भी आप रै बापू दांईं कचरौ'इज लिखै।'

'थारौ के ल्यै। थारै भाऊं चोखौ लिखै चायै कचरौ।' बेलड़ी हाथ हलांवती बोली।

'बावळी तन्नै पतौ नीं है। अंतस री पीड़ कुण जाणै। तन्नै ठा' होवणौ चाइजै कै जद पोथ्यां छपै तो म्हांनै बलिदान देवणौ पड़ै।' दरखत लाम्बी सांस छोड़तां थकां कैयौ।

आशीर्वाद

'बेटा, रोटी देसी के? दो दिनां स्यूं भूखी हूँ ।' अस्सी बरसां री डोकरी एक घर रै बारै खड़ी लुगाई स्यूं हाथ पसार'र कैयौ।

'आगै चाल। राममार्या मंगता इत्ता होग्या कै सांस ई को लेण द्यै नीं।' मुंडौ बिचकांवती लुगाई बोली। डोकरी आसीस देवतां थकां कैयौ-अच्छ्या बेटा, भगवान तन्नै सुखी राखै।



व्यंग्य कविता - रफ़्तार / दीनदयाल शर्मा

रफ़्तार

बै'

गया

रफ़्तार में

अर

आया

अखबार में .

- दीनदयाल शर्मा

हास्य कविता : दीनदयाल शर्मा

जगियो

जागिये री मा बोली

सुणो के स्याणो

जगियो लागे मन्ने

घणो अणखाणो

दसवीं में

बड्गर,

रै'ग्यो च्यार बार

थे कद ताईं

खिंचोगा

एक गाडो परिवार,

केठा इन्ने

कद अक्कल

आ 'सी,

मन्ने तो लागे

छोरो

हाथां सूं जा 'सी,

या तो इण रै नाक में

नकेल घाल द्यो चटके,

फेर आपणे भलांईं

चाये ठोड़ ठोड़ भटकै,

अर दसुन्वें ईं दिन

बीनणी घर में आ'गी,

उठतां जागतां

जागिये रा

बा ' कान

खींचण लागगी,

मिनो'ईं नीं होयो

घर रो

भाग जाग ग्यो,

अर एक

प्राइवेट इस्कूल में

जागियो मास्टर लागग्यो ..

- दीनदयाल शर्मा.


hasy kavita Srijan 1989 by Deendayal Sharma

Caricature Srijan by Dr. Roop chandr Shastri 'Mayank' May 2010

कविता - भींत / दीनदयाल शर्मा


भींत / दीनदयाल शर्मा

म्हे रै'वां

एक घर में

तीन घर बणा'र

अर

भींत ...

भींत क्यूँ देखै

कोई दूजो,

क्यूँ कै

भींत बणा राखी है

म्हे आपरै आपरै

भीतर...


राजस्थानी दूहा- करम सुधारै काज / दीनदयाल शर्मा

राजस्थानी दूहा-

करम सुधारै काज / दीनदयाल शर्मा

सुरसत बैठी सा'मणै, चित्तर दिखावै च्यार।

बेदां नै तूं बांचले, पाछै कलम पलार।। 1

बैठ्यौ क्यूं है बावळा, टैम लाखिणी टूम।

मे'नत कर तूं मोकळी, झूम बराबर झूम।। 2

घोचो मुंडै क्यूं घालै, करले कोई काम।

घोचो बणसी घेसळौ, लूंठां लोग लगाम।। 3

खाली नां कर खोरसौ, करम सुधारै काज।

भायां में भारी पड़ै, रोज करैलौ राज।। 4

जीभ चटोरी जोरगी, लपरावै क्यंू लार।

रूखी खा ले रोटड़ी, जिनगी रा दिन च्यार।। 5

बातां मत कर बावळा, समझ टैम रो सार।

घट-बध नीं होवै घड़ी, रै'वै अेक रफ्तार।। 6

मे'नत स्यंू मालक बणै, बधता जावै बोल।

गांव गु'वाड़ी गोरुवैं, ढम-ढम बाजै ढोल।। 7

मिनखजमारौ मोवणौ, हरख राख तूं हीय।

लुक्खी सूखी खायके, पालर पाणी पीय।। 8

काम अेक नीं तूं करै , पड़सी कियां पार।

सुपणां लेवै सो'वणां, सांचौ बण सरदार।। 9

मनड़ा मीठा मो'वणां, बंूदी-लाडू बोल।

सगळा करै सरावनां, आखौ कै' अनमोल।। 10

नैतिकता रा दूहा

नैतिकता रा दूहा

1.

मिनख जमारौ मो'वणों,

चोखा कर ले काम,

माटी थूं बण जायसी,

जग में रै'सी नाम..

2.

लख चौरासी जूण में,

मिनख जमारौ ताज,

चौखौ घणो न सोवणो,

नित उठ कर तूं काज..

3.

दरखत जण रा जीवड़ा,
दरखत थूं ना काट,
दरखत मिटसी जगत में,
बचै न टूंडो लात..

4.

चोरी चुगली झूठ में,
मती गंवा थूं नूर,
हिड़दै सांच उतार ले,
मिलै लाड भरपूर..

5.

नां तरसा थूं मायतां,
वणा दिरा नां रीस,
कर ले सेवा मायतां,
आंतड़ियां , आसीस..

6.

जिनगी बोझ न समझ थूं,
क्यूं रोवै थूं यार,
हंसी - खुसी थूं बाँट ले,
जिनड़ी रा दिन च्यार..

7.

मार जिनावर खायगे,

थूं क्यूं बने मुसाण,

साकाहारी जीव थूं,

जीव जगत नै जाण..

8.

गीगी गरभ न मारियो,

गीगी लिछमी रूप,

छोरां सारू छाँवड़ी,

क्यूं समझो थे धूप..

9.

देणों लेणों नीं भलो ,

ब्या' मुकलावै दाज,

पढ लिख पगां चलाय द्यो,

टाबर करसी राज़..

10.

नसौ न चौखौ जीव नै ,

नसड़ो माड़ो काम,

नसड़ो गालै देह नै,

करद्ये काम तमाम..


Srijan 02. 04.2009

by Deendayal Sharma

http://www.deendayalsharma.blogspot.com